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Oct 12

देशवासियों एवं संस्था के सदस्यों व पदाधिकारियों को शुभ दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

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खुशियों का त्यौहार आया दीपावली

दीपों का पर्व यानी दीपावली भारत का ऐसा पर्व है जिसे अमूमन हर धर्म और समुदाय के लोग मनाते हैं। मन के अंधेरे को रोशनी से जगमग कर देने वाला यह पर्व सबका है।
जैन धर्म के लिए यह दिन भगवान महावीर को याद करने का है। दीये जलाने की परम्परा अयोध्या नगरी से शुरू हुई थी। रामायण के अनुसार, रावण पर विजय पाने के बाद भगवान श्रीराम जब अयोध्या लौटे तो नगरवासियों ने दीप जला कर अपनी खुशी का इजहार किया था। कहते है कि मां शक्ति ने भगवान शिव के आधे शरीर को पाने के लिए 21 दिन की तपस्या शुरू की तो भगवान ने मां शक्ति को अपना पूरा बायां हिस्सा बनाया था। उस दिन को भी दीवाली का दिन माना गया था। उसके बाद भगवान शिव को अर्धनारीश्वर कहा जाने लगा।
दीवाली ऐसा त्यौहार हैं जिसे पूरा परिवार एक साथ मिलकर मनाता है। व्यंजन बनाने से लेकर खरीददारी तक सब मंे पूरा परिवार शामिल होता है। उत्तरी भारत में दीवाली पांच दिन तक मनाई जाती है। धनतेरस से शुरू होकर यह पर्व भाईदूज पर खत्म होता है। धनतेरस के अगले दिन नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन राक्षस नरकासुर का वध किया गया था। कहते हैं द्वापर युग में जब कृष्ण का अवतार हुआ तो उस समय राक्षस नरकासुर का आतंक था। पर जब नरकासुर का वध किया गया तो सारी नगरी में रंग-बिरंगी रोशनी से खुशियां मनाई गईं।
दीवाली के दिन चांद का कहीं पता नहीं होता पर चारों तरफ रंग-बिरंगी रोशनी और पारंपरिक दीये की रोशनी में यह अंधेरा गुम हुआ नजर आता है और लोग खुशियां मनाते हैं। दीवाली के अगले दिन होती है गोवर्धन पूजा। कहते हैं इसी दिन श्री कृष्ण ने भगवान इन्द्र को हराया था। महाराष्ट्र में इस दिन को बलिप्रतिपद के रूप में मनाया जाता है। इस दिन पति अपनी पत्नी को तोहफा देते हैं। दीवाली के उत्साह का खूबसूरत समापन भाई-दूज के दिन होता है। इस दिन बहनंे स्नेह और सप्रेम से अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लम्बी उम्र की कामना करती हैं। बिहार में भाइदूज के दिन बहनें अपने भाइयों की गलतियों के लिए ईश्वर से क्षमा मांगती हैं। इसके लिए वे एक नुकीले किस्म के फल को अपनी जीभ में चुभोकर अपने आप को दंड देती हैं और भगवान से दुआ करती हैं कि उनका भाई लम्बी उम्र पाए। दक्षिण भारत में नरक-चतुर्दशी को पटाखों और रोशनी का पर्व माना जाता है। वहीं उत्तर भारत में अमावस्या के दिन लक्ष्मी पूजा की जाती है और पूरे घर में रोशनी जलाई जाती हैं। दीवाली को आर्कषक बनाने के लिए दीये के साथ-साथ रंग-बिरंगी कंदील भी लगाई जाती है और साथ में फर्श पर खूबसूरत रंगोली भी बनाई जाती है। घर के द्वार पर और पूजा स्थल पर रंगोली बनाना शुभ माना जाता है। दीवाली की रौनक में बाजार का भी बड़ा हाथ है। चाहे शहर हो या गांव हर जगह इस दिन उत्सव की धूम रहती है।
न सिर्फ भारत में बल्कि पूरे संसार में दीवाली धूमधाम से मनाई जाती है। चाहे वह अमेरिका हो, नीदरलैंड हो, न्यूजीलैंड, कनाडा, फिजी या जापान हो। नेपाल में दीवाली को ‘तिहार‘ बोला जाता हैं। हालांकि यहां भी यह त्यौहार पांच दिन का होता है पर परम्परा थोड़ी अलग होती है। सिंगापुर और मलेशिया में दीवाली को ‘हरी दीपावली‘ भी कहते हैं।